पुराने हो गये पूजा के आसन का सही प्रयोग



प्रश्न
: मैंने तो आसन फट जाने पर कई बार दूसरा आसन ले लिया, पुराने आसन का पोछा बना लिया। क्या यह सही है? 🙏

उत्तर :

मित्र, आपने बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल पूछा है। लेकिन मैं आपको स्पष्ट रूप से बता दूंयहां तो सर्वथा ही अनुचित और गलत है। आपने जो किया है, वह बिल्कुल सही नहीं है। आइए, इस विषय को बहुत गहराई से समझते हैं

पहली बातजिस आसन ने आपको पूजा का स्थान दिया, उसका अपमान करें

मित्र, जिस आसन पर बैठकर आपने वर्षों तक नाम जाप किया, जिस आसन पर बैठकर आपने अपने इष्ट का ध्यान किया, जिस आसन ने आपको प्रभु के समीप पहुंचने का अवसर दियाआज आपने उसी का पोछा बना लिया। यह बहुत ही दुखद और अनुचित है।

यह वैसा ही है जैसे कोई अपने गुरु का, अपने माता-पिता का, अपने मार्गदर्शक का अपमान करे। जिस चीज ने आपको ईश्वर के करीब पहुंचाया, उसी का यह हाल करना उचित नहीं है।

दूसरी बातआसन की महिमा

मित्र, आसन की अपनी बहुत बड़ी महिमा है। यह वह नौका है जिस पर बैठकर साधक अपने प्रभु के समीप पहुंचता है। जैसे एक नाव नदी पार कराती है, वैसे ही आसन साधक को परमात्मा के समीप ले जाता है।

हमारे शास्त्रों में आसन को बहुत महत्व दिया गया है। आसन पर बैठने से पहले हम आसन को प्रणाम करते हैं, आसन शुद्धि करते हैं। आसन से उठने के बाद भी हम आसन को प्रणाम करते हैं। यह एक परंपरा है, जो हमें सिखाती है कि जिस चीज ने हमें साधना में सहयोग दिया, उसका सम्मान करना चाहिए।

तीसरी बातआसन ऊर्जा ग्रहण करता है

मित्र, आपको यह समझना होगा कि जिस आसन पर आप वर्षों बैठे, उसने आपकी ऊर्जा को ग्रहण किया है। आपका मंत्र जाप, आपका नाम जाप, आपका ध्यानयह सब आपके आसन ने सुना है, ग्रहण किया है। यह आपकी साधना में सहयोगी रहा है।

शास्त्रों में हमेशा यह मनाही की गई है कि अपना आसन किसी को छूने भी दें, क्योंकि जो दूसरा साधक उस पर बैठता है, वह आपकी ऊर्जा ग्रहण कर लेता है। यदि आपने अपने आसन का पोछा बना लिया, तो वह आपकी ऊर्जा पैरों के नीचे रौंदी जा रही है। यह आपके लिए शुभ नहीं है।

चौथी बातफटे आसन का क्या करें?

मित्र, अब बात करते हैं कि फटे आसन का क्या करना चाहिए

🌺पहला उपाययदि आसन केवल थोड़ा सा फटा है, तो उसे सिलवा लें। उसकी मरम्मत करवा लें। उसी आसन पर बैठना जारी रखें।

🌺दूसरा उपाययदि आसन बहुत अधिक फट गया है और उस पर बैठना संभव नहीं है, तो उसे किसी साफ कपड़े में लपेटकर एक कोने पर सुरक्षित रखें। उसे सदा प्रणाम करें।

🌺तीसरा उपाययदि आप नया आसन लेना चाहते हैं, तो पुराने आसन को नए आसन के नीचे रख दें। जैसा मैंने पिछली पोस्ट में बताया थानीचे नया आसन, बीच में पुराना आसन, ऊपर नया आसन। इस तरह पुराने आसन की ऊर्जा बनी रहेगी।

🌺चौथा उपाययदि आप पुराने आसन का उपयोग बिल्कुल नहीं करना चाहते, तो उसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें, या किसी पेड़ के नीचे रख दें। लेकिन उसे पोछा बनाकर पैर पोंछने का उपयोग करनायह सर्वथा अनुचित है।

पाँचवीं बातयाद रखने वाली बातें

🌺आसन वह नौका है जो आपको प्रभु के समीप पहुंचाता है। उसका सम्मान करें।

🌺आसन पर बैठने से पहले और उठने के बाद आसन को प्रणाम करें।

🌺आसन आपकी ऊर्जा, आपके मंत्र, आपके जाप को ग्रहण करता है।

🌺फटे आसन की मरम्मत करवाएं, या उसे सुरक्षित रखें।

🌺फटे आसन को कभी भी पोछे, चटाई, या किसी अन्य अपमानजनक वस्तु में बदलें।

🌺यदि आप नया आसन ले रहे हैं, तो पुराने आसन को नए आसन के नीचे रखें।

आखिरी बात

मित्र, हो सकता है कि आपने अनजाने में ऐसा कर दिया हो। लेकिन अब आपको इसकी गलती का एहसास हो गया है। अब से कृपया ऐसा करें। अपने आसन का सम्मान करें। जिस आसन ने आपको प्रभु के समीप पहुंचाया, उसका आभार व्यक्त करें। उसे एक कोने पर सुरक्षित रखें, उसे प्रणाम करें।

जय गुरुदेव 🙏


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