Mahakali Anushthan And Sadhna शनैश्चरी अमावस्या के शुभ अवसर पर विशाल महाकाली अनुष्ठान एवं साधना

।। गं गणपतये नमः।।

या देवि सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

शनैश्चरी अमावस्या के शुभ अवसर पर विशाल महाकाली अनुष्ठान एवं साधना


।। ॐ नमश्चण्डिकायै।।

कृष्णकायाम्बिकाय विद्महे, पार्वतीरूपाय धीमहि। तन्नो कालिका प्रचोदयात्।।

आदरणीय मातृ अनुरागी धर्मप्रेमी भक्तजनों,

        आपलोग परमपूज्य गुरुदेव जी की इच्छा से माता महालक्ष्मी की कृपा दृष्टि प्राप्त करने हेतु अक्षय तृतीया के अवसर पर उपस्थित हो, विस्तृत पूजन किये और अब पुनः शक्ति के एक विशेष महाप्रलंयकारी, अति विध्वंसकारिणी शक्ति भगवती महाकाली का आवाहन करें।

        शनैश्चरी अमावस्या के शुभ अवसर पर दिनांक 14.07.2007 को कुछ पुराने एवं नए शिष्यों के साथ भगवती महाकाली, दक्षिणकाली, श्मशान काली एवं भद्रकाली का अनुष्ठान एवं वृहत्त पूजन संपन्न करने जा रहा हूँ। इस शुभ अवसर पर आप सभी सादर आमंत्रित हैं। अतः अपनी पूजन एवं हवन सामग्री तथा जप माला के साथ उपस्थित हों।

        यह देवताओं की आखिरी महाशक्ति है। अत्यंत प्रचण्डकारी, विध्वंसकारी। ये जब प्रकट होती हैं, तो शिव को भी शव बनना पड़ता है। अतः इनका पूजन कोई मजाक नहीं। क्योंकि ये अगर एक बार चल गयीं तो इन्हें रोकना बिल्कुल असंभव। अतः सामान्य कार्यों के लिए, हँसी-खेल में या परीक्षा लेने मात्र के लिए भूल के लिए भी इनका आवाहन करें। ये महाप्रलय की देवी हैं। इनके काले वर्ण में सब कुछ समाहित हो जाता है। आज जीवन में घोर प्रतिस्पर्धा है। अपने ही शरीर से उत्पन्न जीव, शिष्य-शिष्या, मित्र, रिश्तेदार सभी युद्ध करने को तैयार हैं। भगवान श्री हरि विष्णु के साथ भी तो यही हुआ। अंत में उन्हें आद्याशक्ति का आवाह्न करना ही पड़ा। आज समस्यायें रक्तबीज जैसी हैं। आतंकवाद, भैरवी उत्पीड़न, शत्रु, दरिद्रता इत्यादि। अतः तंत्र क्षेत्र की साम्राज्ञी का आवाहन करना ही होगा।

        लोग पागलों की तरह लक्ष्मी-लक्ष्मी चिल्लाते रहते हैं। किंतु महालक्ष्मी की पवित्रता इसी में है कि महाकाली जागृत रहें। यह निर्जीव कण में भी गति उत्पन्न करती हैं, शक्ति का संचार करती हैं। परम शिव से सर्वप्रथम आलंगनबद्ध हुई। जब भद्रकाली चलती हैं, तो लक्ष्मी-सरस्वती, गंगा इत्यादि को अपमानित होना पड़ा, स्वाहा-स्वधा को निर्वस्त्र कर दिया जाता है, ब्रह्मा का कमण्डलु फेंक दिया जाता है, विष्णु को उनके औकात में रहने को कहा जाता है। भृगु जैसे पक्षपाती ब्राह्मणों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा जाता है। सारे पाखण्ड को, सारे ज्ञान को उलट दिया जाता है, पोथी-पत्रा को फेंक दिया जाता है। सभ्यता के नाम पर वास्तविक परमेश्वर को भूलने वाले, दूसरों का शोषण करने वाले तथाकथित भद्रजनों को सबक सिखाती हैं- देवी भद्रकाली। जब ब्रह्मा, विष्णु, महेश, यम, इन्द्र, सूर्य इनके आगे नतमस्तक हैं, तो ग्राम देवताओं, भूत, पिशाच, चुड़ैल, मजार के पीर बाबा, दाता साहब, तथाकथित गुरुघंटाल गुरुओं की औकात ही क्या है? यह काली का आवाहन हो रहा है। काली अघोरा हैं, नग्न सौन्दर्य है उनका। अतः इस बार अभिषेक पूर्ण रूप से नग्न सत्य, अघोर सत्य ही कहेगा। जब काली चलती हैं, तो मृत्यु देने वालो को भी मृत्यु प्रदान करती हैं। दुष्टों का मुण्ड ही इनका श्रृंगार है। आज क्या हो रहा है? घोर हाहाकार मचा हुआ है। कोई दादी की पूजा कर रहा है, तो कोई नानी की, जितने व्यक्ति उतने पंथ, उतने मत, उतने अवतार, कोई काला बाबा, कोई बंगाली बाबा, कोई जगद्गुरु बना बैठा है, तो कोई मानस मर्मज्ञ। कोई ज्योतिष का पत्रा बाँच रहा है, तो कोई रत्न पारखी। दुनिया भर के अवतार, पैगम्बर, देवदूत, गुरु इत्यादि हो गए हैं। लोग वास्तविक परमेश्वर को छोड़, वास्तविक आध्यात्म को भूल छद्म वेषधारी लोगों को गुरु या प्रजापति समझने लगते हैं। बस काली को चलना ही पड़ता है। आज के युग में पुनः काली की आवश्यकता है, पाखण्ड को पूर्ण रूप से समाप्त करने हेतु।

        लेकिन जहाँ काली पाखण्ड को समाप्त करती हैं, तो सबसे ज्यादा पाखण्ड एवं धार्मिक अत्याचार भी इन्हीं के नाम पर हुआ। कोई अपने देह पर ही काली एवं दुर्गा जैसी महाशक्तियों के आने का स्वांग रचता है, कोई बच्चे की बली लेने को तैयार है। पशुबली करना, शराब पीना, मर्यादाहीन जीवन जीने को ही लोगों ने काली की साधना समझ रखी है।

        आज वास्तविक काली के साधकों की आवश्यकता है, ऐसे पाखण्ड को नाश करने के लिए। याद रखो, अब केवल पति से काम नहीं चलेगा, परमपति का आवाहन करना ही होगा। माँ से काम नहीं होने वाला, उसका दूध सुख चुका है, महामाई को बुलाना ही पड़ेगा। जब दिल से हाय मारी जाती है, तब काली चलती हैं। इस दक्षिणकाली का आवाह्न तो देवी दुर्गा को भी करना पड़ गया। अंत में काली आई, तो सब कुछ अपने में समाहित कर लिया। परमपूज्य गुरुदेव श्री निखिलेश्वरानंद जी वास्तविक काली उपासक थे। उन्होंने नेपाल के गुह्य मंदिरों में एवं पर्वत कन्दराओं में बैठ के काली उपासना संपन्न की थी। वे जिस शहर में जाते थे, वहाँ पहले से बैठे झाड़-फूंक करने वाले, उपदेश प्रवचन करने वाले लोग दो दिन पहले ही भाग जाते थे, उनकी बोलती बंद हो जाती थी। आज जो आप जितने मामस मर्मज्ञ, भागवत उपदेशक, बापू लोग, ज्योतिषी इत्यादि देख रहे हैं, वे सब गुरुदेव जी के चरणों में गिर कर भीख मांगते थे कि कुछ हमलोगों की भी तो रोजी-रोटी चलने दें। उनका नाम सुन के ही बड़े-बड़े तांत्रिकों को पसीना जाता था। आज पटना में भी एक बहुत बड़े आश्रम में काली के नाम पर पाखण्ड हो रहा है। लड्डू की तरह काली मंत्र बांटे जाते हैं। दवा बिक्री का केंद्र है। आध्यात्मिक ज्ञान के बराबर। शीघ्र ही अभिषेक इन सारे पाखण्डों का अपने गुरु के निर्देशन में पूर्ण रूप से समाप्ति करेगा। काली अपेक्षाहीन है। बस शिव की पूजा होती रहे, यही एकमात्र उनका उद्देश्य। हिंसा जिस प्रकार पूर्ण सत्य नहीं, उसी प्रकार ‘‘अहिंसा परमो धर्मः’’ का सिद्धांत भी खोखला है। कोई भी सिद्धांत परम सत्य होता ही नहीं। जीवन एक युद्ध क्षेत्र है। युद्ध से भाग नहीं सकते। कायरों की तरह औरत के आँचल में छिप के मरने से अच्छा है, युद्ध क्षेत्र में वीरों की तरह मरा जाय। आज हिन्दुत्व पर, भारत माता पर चारों ओर से आक्रमण हो रहा है। अतः इस युद्ध की देवी का आवाहन करना ही होगा।

        अहिंसा का रट लगाने वाले लोगों को चैलंेज है, गली के पागल कुत्ते या मतवाले सांढ़ या पागल हाथी के गले में बुद्ध या 24वें तीर्थंकर महावीर जैसे अहिंसा के ठेकेदारों का चित्र टांगकर या अहिंसा परमो धर्मः बोलकर भौंकना या काटना या प्रहार करना बंद करा दो, तो यह अभिषेक भी काली की उपासना छोड़ देगा और तुम्हारे धर्म में जाएगा। यह श्मशान की देवी है। कब्रिस्तान जहाँ विषय-वासना, पाखण्ड एवं बंधन का जगह है, तो श्मशान मुक्ति का परम क्षेत्र। आज हमार मस्तिष्क भी सड़ी-गली बातों, परम्पराओं को ढोने वाला कब्रिस्तान हो गया है। अतः श्मशान की देवी को आना ही पड़ेगा, मुण्ड मर्दन करने के लिए। किस ग्रह की औकात है, जो इनके साधक के कुण्डली में क्रूर दृष्टि डाले। अगर बिहार की भाषा में बात करूं तो इनका साधक ग्रहों, भूत-पिशाच, ग्रह-नक्षत्र, अधूरा ज्ञान-विज्ञान, झूठे देवी-देवताओं इत्यादि को बांध के रखता है। रावण इनका परम उपासक था, शनि समेत नवग्रहों को लंका में बांध के रखता था। हनुमान पर साक्षात् सवारी की थी, देवी काली ने, शनि को अपने पूंछ में बांध-बांध कर पीटा (भैं भैं भैं भद्रकालिके क्रूर ग्रह बाधा निवारिणी)

 

        काली का तो स्पष्ट कथन है, हँस के नहीं आओगे, तो रो के तो आओगे ही, मेरी शरण में। उसी प्रकार शक्ति अनुसंधान केंद्र में एक दिन सब को आना ही है, क्योंकि यहाँ काली की घोर तांत्रोक्त उपासना होती है। आग लगने पर कुआँ नहीं खोदा जाता।  जाने कब विपत्ति जाय। अतः समय पर ही काली उपासना संपन्न कर लो। जो भी मेरे नये-पुराने शिष्य हैं, या जिन्होंने किसी भी प्रकार से मुझसे कोई यंत्र बगैरह ले कर धारण किया है, वे सभी प्रकार का बहाना छोड़कर इस अनुष्ठान में सम्मिलित हों। कोई बहानबाजी नहीं। अब या तो संबंध रखो या सदा-सदा के लिए तोड़ लो। ये बलिप्रिया हैं। किसी--किसी को तो बलि बनाना ही पड़ेगा। एक बात और काली की साधना में जबान नहीं लड़ाया जाता, नजर नहीं मिलाया जाता, केवल चरणों में दृष्टि रखी जाती है। अतः बकवास करने वाले लोग, व्यर्थ की सवाल करने वाले, अभिषेक को धोखा देने की तमन्ना रखने वाले लोग, मुँह लगाने वाले, किंतु-परंतु में उलझे रहने वाले लोग, अपने घर पर ही खुश रहें, उन्हें आने की आवश्यकता नहीं। कालिकामयी हो रहा हूँ, अब केवल आज्ञा ही चलेगा।

        यह अभिषेक घोर उपासक रहा है-काली का। गुरु से दीक्षा प्राप्त कर पूर्ण मनोयोग से काली की साधना संपन्न की एवं जीवन के प्रत्येक शत्रुओं तथा बाधाओं का क्रूरतापूर्वक नाश किया। आज मेरे जो भी शत्रु हैं, वे हृदय पर हाथ धरकर देख लें। उनके घर में मृत्यु, पागलपन, विनाश एवं दरिद्रता व्याप्त है। मेरा प्रत्येक शत्रु जिसने भी शत्रुता की भाव से मुझे देखा घोर व्याधि से ग्रस्त है। अतः आप सभी निवेदन है कि जीवन के हर क्षेत्र में, हर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने हेतु इस तंत्रमाता का मेरे साथ आवाहन एवं पूजन करें तथा वास्तविक गुरु एवं परमेश्वर को पहचानें।

        किसी भी प्रकार की विशेष जानकारी के लिए सीधे मुझसे संपर्क करें। उपस्थित होने वाले लोगों को विशेष उपहार एवं यंत्र प्रदान किया जाएगा। साथ ही, जींदगी में एक बार कालिकास्त्र एवं प्रत्यंगिरा चलाने की स्वतंत्र अनुमति।

फोन नंबर- 2643488, मोबाइल नंबर-9431880155, 9431442522. (मेरा बहुत पुराना नंबर। ये नंबर अब बंद हो चुका है। कृपया इस पर फोन नहीं करेंगे।)

        एक बात और ध्यान दें कि काली हमेशा 16 वर्षीय कन्या के रूप में रहती हैं, दर्शन देती हैं। और एक 16 वर्षीय कन्या किसी युवा के संग ही लीला करेगी, खेलेगी-कूदेगी, किसी बुढ़े एवं निर्बल हो चुके गुरु के संग नहीं।

        इस साधना में आने या आने के लिए आपलोग स्वतंत्र हैं। किंतु शक्ति अनुसंधान केन्द्र की कार्यकारिणी में शामिल होने वालों के लिए आना आवश्यक है। इसी दिन संस्था के अध्यक्ष और सचिव का भी चुनाव किया जाएगा। आवश्यक वस्तुओं की सूची मुझसे ले लें। इस दिन परम गोपनीय मारण तंत्र का भी प्रयोग कराया जाएगा। अतः बिना कोई कारण के खेल-खेल में किसी पर प्रयोग करें। अगर कोई विशेष शत्रु हो, तो उसे चिन्ह्ति कर लें एवं उसका नाम काली स्याही से पिता/पति के साथ लिख कर लायें। अगर आप किसी भी प्रकार के मुकदमेबाजी में फंसे हुए हैं, तो चले आयें, आपको एकतरफा विजय दिलवाउँगा, लेकिन हत्या एवं स्त्री बलात्कार का कोई सुनवाई नहीं।

        इस दिन गुरु एवं गणपति पूजन, शिव पूजन, महाविद्या आवाह्न, कलश स्थापन, यंत्र सिद्धि, षोडशोपचार वास्तविक पूजन, 64 उपचार काल्पनिक पूजन, आवरण पूजन, कालिकास्त्र, प्रत्यंगिरा एवं 108 बिल्व पत्र प्रयोग संपन्न कराया जाएगा। काली के विशेष मंत्रों के अलावा संभव हुआ तो सहस्रनाम से हवन भी संपन्न कराया जाएगा। उपस्थित लोगों को उनके माँग के अनुसार विशेष शक्तिपात दीक्षा प्रदान की जाएगी। जिनकी किसी भी प्रकार का भूत-प्रेत लगा हो, वे सूचित कर देंगे।

        अनुष्ठान में शामिल होने के लिए आवश्यक शुल्क -

        उन पुराने शिष्यों के लिए जो अक्षय तृतीया की साधना में सम्मिलित हो चुके हैं - 101/- रूपये मात्र

        पति-पत्नी के साथ - 125/- रुपये मात्र

        नये शिष्यों के लिए - 125/- रुपये मात्र, पति-पत्नी के साथ- 151/- रुपये

        नोट:- कृपया आवश्यक राशि 10 जुलाई 2007 तक जमा कर दें। अन्यथा बैठने नहीं दिया जाएगा। इस बार कोई बकाया कार्य नहीं होगा।

        समारोह/अनुष्ठान की तारीख- 14 जुलाई 2007, दिन-शनिवार, समय- 09:30 बजे सुबह

        ध्यान दें:- यह तंत्र क्षेत्र की सर्वोच्च साधनाओं में से एक है। अतः इसे हल्के स्तर से लें। जब तक कोई व्यक्ति महाविद्या उपासना संपन्न नहीं कर लेता है, तब तक वह वास्तविक तंत्र क्षेत्र में प्रवेश पा ही नहीं सकता। इस साधना में डरपोक किस्म के व्यक्ति आयें।

        अगर आपके आस-पास कोई दुष्ट तांत्रिक, ओझा-गुणी या डायन है, तो उसका नाम मुझे दे दें, उसकी शक्ति समाप्त कर दी जाएगी। जिसको किसी भी प्रकार का शक्ति प्रकोप हुआ हो, वे बता देंगे, शांति करा दी जाएगी।



कृपया निम्नांकित सामग्री लेकर उपस्थित होंगे -

लाल वस्त्र एवं पूजा की आसनी, जप माला (रुद्राक्ष या लाल चंदन की), तांबे का जलपात्र (लोटा) एवं आचमनी

अनार - 1 पीस, पीला नींबू- 5 पीस, गुलाब का लाल फूल - 3 पीस, उड़हुल की माला- 2 पीस,

गेंदा का बड़ा माला- 1 पीस, पीले एवं सफेद छूट्टे फूल, बेलपत्र- 50 पीस तथा हवन सामग्री

नोट:- कार्यक्रम में परिवर्तन भी किया जा सकता है (वर्षा इत्यादि होने पर) 

पुराने शिष्य किसी भी प्रकार के आध्यात्मिक समस्या के निवारण हेतु या सवाल-जवाब हेतु केवल रविवार को ही मिलें।

समय:- सुबह में 11:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक। शाम में 04:00 बजे से 06:00 बजे तक।



प्रकाशक :- श्री अभिषेक कुमार, मंत्र, तंत्र, यन्त्र विशेषज्ञ, शक्ति सिद्धांत के व्याख्याता, दस महाविद्याओं के सिद्ध साधक, श्री यन्त्र और दुर्गा सप्तशती के विशेषज्ञ, ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री.

Mob:- 9852208378,  9525719407  

मिलने का वर्तमान पता:-
पुष्यमित्र कॉलोनी, संपतचक बाजार
(गोपालपुर थाना और केनरा बैंक के बीच/बगल वाली गली में)
इलेक्ट्रिक पोल नंबर-6 के पास
पोस्ट-सोनागोपालपुर, थाना-गोपालपुर
संपतचक, पटना-7
नोट:-संपतचक बाजार, अगमकुआँ में स्थित शीतला माता के मंदिर से लगभग 8 किमी॰ दक्षिण में स्थित है। नेशनल हाईवे - 30 के दक्षिण में एक रोड गयी है, जो पटना-गया मेन रोड के नाम से जाना जाता है। इस रोड पर ही बैरिया बस स्टैण्ड है। इसी बस स्टैण्ड के दक्षिण संपतचक बाजार स्थित है। यहीं केनरा बैंक के ठीक बगल वाली गली में मेरा मकान है। जहाँ आप सभी धर्मप्रेमी भक्तजन/जिज्ञासु समय लेकर मुझसे कभी भी मिल सकते हैं।

उस समय के अनुष्ठान का निमंत्रण इस प्रकार से स्वयं अपने हाथों से लिखकर फोटोकॉपी करवा कर वितरित किया गया था। यहाँ प्रस्तुत है मेरे हाथ का लिखा हुआ वर्ष 2007 का वर्षों पुराना यानी 19 वर्ष पहले का अनुष्ठान हेतु निमंत्रण का पांडुलिपि :-

















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