वास्तविक परमात्मा और पंच महादेव बनाम ग्राम देवता और कुल देवता

 वास्तविक परमात्मा और पंच महादेव बनाम ग्राम देवता और कुल देवता


 

            आजकल हमारे समाज व धर्म में एक चीज देखने में बहुत आ रही है की हर थोड़े समय में कोई ना कोई एक नए देवी देवताओं का प्रचार प्रसार होने लगता है और लोग बड़ी संख्या में उनका प्रचार प्रसार व पूजा आदि चालू कर देते हैं और बड़े-बड़े मंदिरों का निर्माण कर देते हैं।
            परंतु जो आस्तिक जन है जो शास्त्र अध्ययन करते हैं या थोड़ा सा भी विचार करते हैं उनके मन में यह आता है कि कैसे यह समझे कि कौन शास्त्रीय है और कौन और अशास्त्रीय कौन पूजनीय है और कौन पूजन करने योग्य नहीं है?
            सबसे पहली बात कौन पूजनीय है और कौन पूजनीय नहीं है तथा किसका मंदिर बनेगा और किसका नहीं इसके लिए शास्त्र ही प्रमाण है
            शास्त्र कहते हैं कि परमात्मा निराकार है तथा जब उनकी साकार स्वरूप लेने की इच्छा होती है तो वह पांच सकार स्वरूपों में ही अभिव्यक्त होते हैं वह 5 स्वरूप है -: गणेश, विष्णु, शिव ,दुर्गा और सूर्य इन्हीं पांच स्वरूपों के तथा इनके अवतार के रूप में ही निराकार परमेश्वर साकार स्वरूप में आकर की लीला करते हैं।
            तो बात साफ है अगर इन पांच स्वरूपो व इनके अवतारों के मंदिर है तो वह हम सभी सनातनियों के लिए पूजनीय और प्रचार प्रसार करने योग्य है इसके अलावा नहीं।
            पर इसमें एक बात ध्यान देने योग्य है
            शास्त्रों में कुछ सामान्य व्यक्तियों को भी ईश्वर ने वरदान स्वरूप देवता होकर पूजनीय होने का वरदान दिया है जिन्हें हम ग्राम देवता स्थान देवता कुल देवता के रूप में पूजते हैं। और जिनकी पूजा हमें करनी चाहिए परंतु उनके नाम से ही हमें पता चल रहा है कि यह कितने लोगों द्वारा पूजे जाएंगे जैसे ग्राम देवता सिर्फ उस ग्राम के लोगों के द्वारा ही पूजनीय है। कुल देवता उस कुल के लोगों के द्वारा ही पूजनीय है अन्य के द्वारा नहीं इस तरीके से हम हमारी बुद्धि के द्वारा निर्णय कर सकते हैं
            अब आजकल एक नया तरीका और चल रहा है की कोई व्यक्ति सिद्ध था उसे अनेकों शक्तियां प्राप्त थी तो उसकी जादुई शक्ति देखकर उसे भगवान मान लिया गया और आज मंदिर निर्माण करा कर भरपूर मात्रा में पूजा करते हैं यह शास्त्र सिद्धांत के विपरीत है शास्त्रों में तो बहुत से ऐसे ऋषि मुनियों का वर्णन है जिनको इससे भी बड़ी सिद्धियां प्राप्त थी और जो इससे बड़ी-बड़ी शक्तियों का प्रदर्शन करते थे परंतु कभी भी सनातियों ने उनके मंदिर बनाकर पूजा नहीं की इसलिए किसी की भी सिद्धि शक्ति आदि को देखकर उसका मंदिर बनाना कदापि उचित नहीं है
            अंत में बस यही है कि जो पांच स्वरूप तथा उनके अवतार है उन्ही के मंदिर बनाकर पूजन आदि करना चाहिए तथा प्रचार प्रसार करना चाहिए।



लेखक :- श्री अभिषेक कुमार, मंत्र, तंत्र, यन्त्र विशेषज्ञ, शक्ति सिद्धांत के व्याख्याता, दस महाविद्याओं के सिद्ध साधक, श्री यन्त्र और दुर्गा सप्तशती के विशेषज्ञ, ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुशास्त्री.
Mob:- 9852208378,  9525719407  

मिलने का वर्तमान पता:-
पुष्यमित्र कॉलोनी, संपतचक बाजार
(गोपालपुर थाना और केनरा बैंक के बीच/बगल वाली गली में)
इलेक्ट्रिक पोल नंबर-6 के पास
पोस्ट-सोनागोपालपुर, थाना-गोपालपुर
संपतचक, पटना-7
नोट:-संपतचक बाजार, अगमकुआँ में स्थित शीतला माता के मंदिर से लगभग 8 किमी॰ दक्षिण में स्थित है। नेशनल हाईवे - 30 के दक्षिण में एक रोड गयी है, जो पटना-गया मेन रोड के नाम से जाना जाता है। इस रोड पर ही बैरिया बस स्टैण्ड है। इसी बस स्टैण्ड के दक्षिण संपतचक बाजार स्थित है। यहीं केनरा बैंक के ठीक बगल वाली गली में मेरा मकान है। जहाँ आप सभी धर्मप्रेमी भक्तजन/जिज्ञासु समय लेकर मुझसे कभी भी मिल सकते हैं।

Post a Comment

0 Comments